सायबर क्राइम को सुलझाने की धीमी गति

नागपूर :- क्या आपको पता है सायबर क्राइम से जुड़े हुए मामले जल्द क्यों नही सुलझे जाते ? उत्तर बहोत ही सीधा है | जरुरत से जादा के मामले दर्ज होना और उनको सुलझाने के लिए मानव संसाधनोंकी कमी से न्यायालय से आनेवाले अनेक मामले आज भी प्रलंबित है | नागपूरके प्रादेशिक न्यायवैद्यक विज्ञानं प्रयोगशाला (RFSL) में उच्च न्यायालय मेंसादर किये जानेवाले इलेक्ट्रोनिक एविडेंस के तीन हजार से जादा केसेस प्रलंबित है | नागपुर विभाग में आनेवाले छह जिले के मामले इसमें सम्मिलित है | इलेक्ट्रानिक्स और सायबर विंग २०१५ से अस्तित्व में आने के बाद सुरु में २५ से ३० तक के मामले विश्लेषण के लिए आते थे |आज की तारीख में हर महीने १०० से जादा मामले इस प्रयोगशाला में विश्लेषण के लिए भेजे जाते है| इसका मुख्य कारण मानव संसाधनोंकी की कमतरता बताई जाती है | सायबर क्राइम से जुड़े बहोत सरे प्रकरण हमारे आजूबाजू होते है | पुलिस में तक्रार करने के बावजूत उसका जल्द कोई हल नही निकलता | सिसिटीव्ही फुटेज, मोबाईल डाटा, ओडिया और विडिओ क्लिप्स का विश्लेषण इस RFSL में होता है |
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