अगर बौद्ध बनना है तो......

बौद्ध बनने के लिए किसी भी भिक्खू से दीक्षा या प्रमाणपत्र की जरूरत नही ऐसा दी बुद्धिस्ट शेड्यूल कास्ट मिशन ऑफ इंडिया के संस्थापक तथा राष्ट्रीय संयोजक अच्युत भोइटे इन्होंने कहा है। अगर आप अनुसूचित जाति के व्यक्ति है और बौद्ध धर्म स्वीकृत करना चाहते है तो आपको बस धर्म के खाने में बौद्ध लिखना है। दरसल बौद्ध बनने के लिए भीड़ उमड़ती है। कोई भिक्खु से दीक्षा लेता है कोई, अलग अलग एजंसी से दीक्षा लेता है। लेकिन ये विधिपूर्वक दीक्षा लेने से ही बौद्ध बनता है ऐसा नहीं। दरसल बौद्ध बनना है तो सिर्फ कागजात पर हिंदू के बजाय बौद्ध लिखना जरूरी है। बौद्ध बनने के लिए हमें न तो किसी भिक्षु से धम्म दीक्षा लेने की जरूरत हैं और न ही धर्म प्रमाणपत्र की आवश्यकता हैं। हमें बस हिन्दू के बजाए धर्म - बौद्ध लिखना हैं। मतलब धर्म - बौद्ध और अनुसूचित जाति-चमार, महार, पासी, मादिगा, आदि द्रविड, माला, दूसाध, धोबी, परिया, भंगी, कोली, आदि कर्नाटका, राजबंशी, बागडी, मुशहर, नमोशूद्रा आदि लिखते ही आपको संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश 1950 लागू हो जाता हैं और आपका धर्म बदल कानूनी मानकर के आपके सभी संवैधानिक अधिकार सुरक्षित हो जाते हैं। आप के अब तक के दस्तावेज़ों में हिन्दू लिखा होगा, क्यूंकि कल तक आप हिन्दू थे इसीलिए वे सभी दस्तावेज कानून के तहत सही हैं। उसमे सुधार करने की बिल्कुल भी आवश्यकता नही हैं। आज अभी से, अपने बच्चों के स्कूल नामांकन से लेकर के निजी, सरकारी दस्तावेज हो या भारतीय जनगणना, जहाँ कही पर भी धर्म लिखने की बात होगी तो हिन्दू के बजाए धर्म - बौद्ध ही लिखें। ऐसा भोइटे जीने कहा है।


अच्युत भोइटे
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