भारतीय स्वतंत्रता के बाद 26 जनवरी 1950 में पूरे देश में संविधान लागू कर हम रिपब्लिक इंडिया के नागरिक बन गए। संविधानमे बताए गए मार्ग से हमारा देश चलता है। लोगों ने अपने भले के लिए प्रतिनिधि चुनकर उनके माध्यम से देश चलाना यही रिपब्लिक का अर्थ होता है । आसान शब्दों में Republican means To Represent people ऐसा कह सकते है। पिछले 75 सालो में लोकतंत्र को मजबूत करने का काम डॉ बाबासाहब आंबेडकर के संविधान ने किया। मात्र समाज का एक तबका ऐसा है जो वर्णव्यवस्था को ही बढ़ावा देने की कोशिश करता है। इसके लिए भौतिकवाद, पूंजीवाद, खाजगीकरण, को बढ़ावा देना, धार्मिक अंधश्रद्धा को फैलाकर सांस्कृतिक वर्चस्व प्रस्थापित करने की पुरजोर कोशिश में रहता है। ऐसे विषमतावादी मानसिकता केवल तथागत गौतम बुद्ध का धम्म ही नष्ट कर सकता है। भारत में हजारों सालोसे दबे कुचले लोगोंके रोजमर्रा की जिंदगी, उनके सुखदुख, समस्याएं , उनकी संस्कृति उजागर करने का प्रयास रिपब्लिकन वॉइस के माध्यम से करने का प्रयास करने की हमने ठानी है। आप भी हमारे इस प्रयास में साथ देंगे ऐसी अपेक्षा करते है।
नागपुर :- अम्बाझरी स्थित डॉ आंबेडकर सांस्कृतिक भवनगिराने के निषेध में सांस्कृतिक भवन बचाव कृति समिति के माध्यम से महिलाओं ने आंदोलन शुरू किया है | नागपुर को परिवर्तन भूमि बोला जाता है | क्योंकि महामानव बाबासाहबने १६ अक्टूबर १९५६ में विषमतापूर्ण हिंदू धर्म के दलदल से निकालकर समता, बंधुता सिखानेवाले बुद्ध धम्म की दीक्षा इसी नागपुरसे दी थी| और दुनियाभर में नागपुर का नाम रोशन किया था | खून का एक कतरा भी न गिराकर बाबासाहब ने ५ लाख लोगोंको धम्म दीक्षा देकर रक्तविहीन क्रांति की थी | इस ऐतिहासिक घटना की याद में नागपुर महापालिकाने बाबासाहब का सन्मान करके उनकी याद में अम्बाझरी स्थित तालाब के पास उनका एक स्मारक खड़ा करने का ऐलान किया | अम्बाझरी तालाब के नजदीक की ४४ एकड़ जमीन पर एक बाग और बाबासाहब की नाम से सांस्कृतिक भवन खड़ा किया | आज उसकी किमात करोड़ो रुपये में है | बस इसी बातसे कुछ लोगोंकी नजर इस जमीन पर थी| सरकारने मेसर्स गरुडा अम्यूजमेंट पार्क इस कंपनी को ९९ सालोंकी लीज पर जमीन पर्यटन विकास के लिए दी है| और उसके लिए बौद्ध लोगों को किनारे रखा गया | पिछले ५७ सालोंसे ये भवन की वास्तु वहा पे थी लेकिन कोविड-१९ के करोना काल मेंlockdown के समय टिन लगाकर बुलडोज़र से वास्तु गिरा दी गयी | इसी बात का लोगों में गुस्सा है की महामानव बाबासाहब आम्बेडकर उनके नाम से खड़ा किया हुआ भवन का रखरखाव न करके उसे प्राइवेट लोगो के हाथ में क्यों सोपा गया | इसी सोचने बौद्ध लोगोने आंदोलन का ऐलान किया है| २० एकड जमीन वापस करने के हेतु से पिछले २०जनवरीसे महिलाओंने उसी स्मारक के सामने आन्दोलन प्रारम्भ किया है| आम्बेडकर सांस्कृतिक भवन की २० एकड़ जमीन पर पर्यटन विकास क्षेत्र घोषित करने की अधिसूचना समाप्त कर दी जाय | मेसर्स गरुडा अम्यूजमेंट पार्क या कंपनीके संचालकों पे गुनाह दाखिल किया जाय और शासनने अविलंब २० एकड जमीन पर स्मारक निर्माण करने का काम सुरु किया जाय इस मुख्य मांगों को लेकर ये आंदोलन जारी है |
नागपुर, अगर किसी को अंधविश्वास का विनाश करना है तो पढ़िए “अंधश्रद्धेचा नायनाट” ये किताब| मैंने आज तक अंधविश्वास को इस कदर चुनौती देकर मनुष्य को प्रबुद्ध बनाने वाली किताब नही पढ़ी, ऐसी बात एक पाठक जीतू चौबे ने कही.
उन्होंने कहा, हालही में नागपुर में बागेश्वर धाम धीरेन्द्र शाश्त्री और अखिल भारतीय अंधश्रध्दा निर्मूलन समिति के श्याम मानव के बिच जो वाकयुद्ध और क़ानूनी युद्ध छिड़ा है वह इसी विषय पर है| मैंने इस विषय पर कई किताबे पढ़ी है, व्हाट्सअप के माध्यम से कई लेख, चर्चा और बहस हुई है | लेकिन किसीने भी अंधविश्वास पर मेरे प्रश्नोंका जवाब नही दिया| किसीने भी टिप्पणी करने की अनुमति नही दी, या जादा से जादा लोगोने विरोधही दर्शाया | लेकिन दी रिपब्लिकन संघटन के प्रमुख और प्रसिद्ध रिपब्लिकन नेता हर्षवर्धन ढोके इन्होने मेरे सारी शंकाओं निरसन किया |
ढोकेजीने यह किताब बहोत ही कम उम्र में लिखी है| समाज को बेवकूफ, कर्मकांड में मशगुल रखने के लिए और खुद का समाज में ऊपर स्थान रखने के लिए कुछ लोग जानबूझकर ऐसे काम करते है| हर्षवर्धन जीने इस किताब में विज्ञान पर आधारित पहला ही अध्याय लिखा| उनका कहना यह है की अंधविश्वास हो या अंधश्रद्धा इसका मूल कारण धर्म पे विश्वास, धर्म पे इस कदर डिपेंड रहना की मानो इन्सान का कोई वजूद नही | ये किताब इस दकयानुसी सोच को ख़त्म करके उदाहरनोंके साथ हमे डर के साथ नही तो निडर होके जीना सिखाती है | अगर ये किताब चाहिए तो निचे दिये गये नंबर पे संपर्क करे
जीतू चौबे - 8308370354
किताब का नाम- अंधश्रद्धेचा नायनाट,
लेखक- हर्षवर्धन ढोके
नागपूर
कामठी मार्गावरील पीडब्लूएस कॉलेज आणि दृष्टी बहुउद्देशीय संस्था इनके संयुक्त प्रयास से तीन दिवसीय घरेलु वस्तु प्रदर्शनी और बिक्री के आयोजन को लोगोने उत्तम प्रतिसाद दिया | फेब्रुवरी १५ से १७ तक इस प्रदर्शनी का आयोजन किया गया जिसमे महिलाओने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया | फरसान, आचार, कपड़े, हैण्डमेड चीजे, ज्वेलरी, गुल, अगरबत्ती, ओर्गेनिक संतरे, मालवणी चटनिया, कच्ची घानी का तेल, पापड़, कुरडई, गुल, तुअर दाल, मीठी कैंडी और किताबे ऐसी १२५ स्टाल्स प्रदर्शनी में लगे थे | अधिकांश महिलओने बनाई वस्तुए इस प्रदर्शनी की खासियत थी | आयोंजन का ये दूसरा साल है | इस समय प्रदर्शनी की आयोजक संगीता चव्हाणने “रिपब्लिकन व्हाईस”से कहा, महिलाए उनके कामो में बहोत निपुण होती है | उनकी बनाई चीजोंको एक मंच की आवश्यकता है | जिससे वे कुछ आमदनी कर सके | पुरे विदर्भ से महिलाये आयी थी | उन्होंने बड़ी मात्रा में भाग लिया और उन्हें लाभ भी हुआ इस बात की ख़ुशी है |
नागपुर :- युएस स्थित हिंडनबर्ग रिसर्च के गंभीर आरोपोसे दो दिन लगातार अदानी समूह के शेयर्स की पिटाई होने से निवेश्कोंको ४.२ लाख करोड़ की संपत्तिपे पानी फेरना पड़ा | दुनियामें आमिरोंके यादी में सातवे नंबर पर अदानी समूह के गौतम अदानी का नाम आता है, किंतु शेयर मार्केट में दो दिन की भारी गिरावट के बाद उनकी संपत्ति २५ बिलियन डॉलर्स से कम हो गयी है| गुरुवार और शुक्रवार को बाजारने ५०० अंको से भी जादा की डुबकी लगाई| शेयर मार्केटमें अदानी समूह के अदानी टोटल गैस, अदानी ट्रांसमिशन, अदानी एंटरप्रायजेस, अदानी ग्रीन एनर्जी, अदानी पोर्ट्स, अम्बुजा सिमेंट्स, अदानी पावर, एसीसी, अदानी विल्मर और एनडीटीव्ही के शेअर्स समाविष्ट है शुक्रवार के दिन २० परसेंट का सर्किट लगकर निचले कीमत पर आ गये, ऐसा बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का डाटा दिखा रहा है | अदानी समुह की स्टॉक्स की कीमते कृत्रिम तरीके से बढाई गयी| यहा से पैसा विदेशो में भेजकर भारत में अदानी समूह के शेयर्स में निवेश करके शेयर्स की कीमते कृत्रिम तरीकेसे बढाई गयी, ऐसा आरोप हिंडनबर्ग रिसर्चने किया है| पुरे ८८ आरोप समूह पे लगाये गये है| अदानी समूहद्वारा जो भी क़ानूनी कारवाई की जाएगी, उसी की तयारी भी हिंडनबर्ग रिसर्चने की है |
आमची चळवळ कशावर आधारित असावी? कोणत्या बॅनरखाली आम्ही व्यवस्थापरिवर्तनाची चळवळ उभी करणार आहोत? ''रिपब्लिकन की बहुजन?" निश्चित्तच 'रिपब्लीकन' ही आमची चळवळ आहे.
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समूहात बहुमताने घेतलेले निर्णय सुद्धा चुकीचे असू शकतात. प्रत्येकवेळी बहुमत हे योग्यच असते असे नाही. एखाद्या निर्णयावर बहुमत देण्यासाठी उपस्थित सदस्यांमध्ये (प्रज्ञा - व्यावहारिक शहाणपण) असतेच असे नाही. अपेक्षित उपाय न देणारे बहुमत नेहमीच संख्यात्मक प्रभाव पाडत असते. बहुमताने घेतलेले निर्णय हे विनाशाचेही कारण ठरू शकते.
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